टूट चुका हूं किस कदर
दिल में आते हैं अब भवंर
सताया जिंदगी ने हर सफर
मुस्कराया गया जहां भी जिधर
शूलों का वसूल न भूल एक पहर
कैसे छलते हैं बनकर सबपे कहर
राह मुश्किल हो किस कदर
मनुज के सामने डोलते भूधर
टूट चुका हूं किस कदर
दिल में आते हैं अब भवंर
सताया जिंदगी ने हर सफर
मुस्कराया गया जहां भी जिधर
शूलों का वसूल न भूल एक पहर
कैसे छलते हैं बनकर सबपे कहर
राह मुश्किल हो किस कदर
मनुज के सामने डोलते भूधर
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