जल रहा है आज मन

जल रहा है, आज मन
जल रहा है, हर बदन
जल रहा है गूले-चमन
जल रहा है शान-ए-वतन

जल रहा है.......

इंसां की सूरत में,
भेड़िये हैं पलने लगे
अपनी मातृभूमि के आंचल को,
मूंग-सा ये दलने लगे
इनको न भय है किसी का,
न है भगवान का-3
इन दरिंदो के कर्मों से होता,
आहत है हर एक मन
जल रहा है......

कल निर्भया थी वो,
आज आसिफ़ा हो गयी
चींखतीं रहीं दोनों की सांसें, फिर आसमाँ में खो गयीं,
इनके दरिंदों को क्यों नही तुम फांसी देते-3
आ जाते हैं इन्हें बचाने,
धर्म की चादर कुछ ओढ़े,
दिल फट क्यों नहीं जाता, तुम्हारा काश एक बच्ची के बाप होते,
कल तक दिल्ली थी जो,
आज सासाराम-उन्नाव-कठुआ हो गयी,
जहाँ क्रूर-अनाचारी दरिंदों ने धावा बोला है,
उनकी इस कुकर्म का सजा भुगत रहा है,
भारत का हर जन-जन
जल रहा है.....

जो बेटियों को सरेराह बदनाम करें,
भरे चौराहों में जो भी उनको नीलाम करें,
उनको फाँसी पर लटका दो,
ये अब हम खुलेआम करें,
दशहत भर दें उनके मन में,
न फिर दूसरा कोई ये अंजाम करे,
"निश्छल" कहता है ये ललकार कर,
सरेराह इनका अपमान करें,
कर दो इनका शमन,
और कर दो इनको दमन

(स्वरचित)
BY-ANIL KUMAR "निश्छल"

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