जिंदगी से कभी गिला न कर

जिन्दगी से कभी गिला न कर

मिल जाएं हंसीं पल जब,
तुझे जो भी जतन से कभी।
रब का करम मान उसे,
बेझिझक कुबूल करना।

कठिन किरदार भी यहाँ,
उत्तम हृदय को मिलता है।
न घबराना कभी बाधा से,
खम ठोंक चूर-चूर करना।

आँधियों की औक़ात क्या?
जो तेरे हौंसलों को तोड़ दे।
मेहनत के नूर की रौशनी से,
नित नई ऊंची उड़ान भरना।

हुनर भरे पड़े है सारे कितने?
हाथों से तू नित निखारना।
कोई न साथ देता है कभी
जिन्दगी को खुद ही संवारना।

अनिल कुमार
"निश्छल"






Post a Comment

0 Comments