हाई वे
कितना विशाल है?
देखो तो ये हाई वे,
गाडियाँ चलती हैं।
दौड़ती जाती हैं।
एक बार चलीं तो,
मंजिल तक न रुकती।
कितना तेज भागती हैं?
आखिर कहाँ जाती हैं?
रोज ये इतनी गाडियाँ,
कुछ छोटी,कुछ बड़ी,
रंग-रंगीली, छबीली,
सरपट दौड़ती हैं।
ड्राइवर जैसा चाहता,
दौड़ाता है इन्हें,
कठपुतली जो हैं।
किसी के हाथों की,
वैसे भी कठपुतली
होना,शर्म की बात है।
और हाँ सीमा से तेज,
होना भी घातक है।
जिंदगी को जोखिम,
में डालना कोई खेल न है।
धीरे चलना अच्छा है।
न कोई खतरा, न हानि
ये हाईवे मुँह फाड़े,
वाट देखते हैं।
किसी न किसी
मुसीबत को खुद
बुलाते हैं।
आखिर ये हाईवे
किसी मुसाफ़िर के
दम घुटने पर घबराते हैं
सहम जाते हैं खुद
रब से दुआ करते हैं
और किसी मुसाफ़िर को
ये दिन नसीब न हों
कितना दुखदायी होता है
अपनो से जुदा होना
कोई न हो जुदा अपनों से
पर हाईवे को जुदा होना
पड़ता है हर गाड़ी से
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