मुश्किलें जीतना सिखाती हैं





ऐ मुश्किलों!
तेरे नाम अनेक तेरे रूप अनेक,
रंग उड़ते चेहरों के दस्तक तेरी देख
तेरी सरपरस्ती कौन चाहता है?
तेरा साथ न कोई मांगता है।
ऐ मुश्किलों!
बताओ तो जरा कहाँ से आई हो
कहाँ तक जाना है तुम्हें
आज मेरे अंग-संग हो तुम
कल किसको सताना है तुम्हें
ऐ मुश्किलों!
चलो साथ मुझे न कोई गम है
तेरा साथ है यही क्या कम है
तेरे साथ से ही निखरता हूँ मैं
तेरे आँचल में ही संवरता हूँ मैं
ऐ मुश्किलों!
मुझे जितना सताना है सता ले
जितना चाहे तू मुझे रुला ले
तेरा संबल ही हरदम पाना चाहूँ
तेरे दम पे ही मुस्कराना है मुझे
ऐ मुश्किलों!!!
कायर,बुझदिल तुझसे डरते हैं
हरदम जीतने का दम भरते हैं
तेरे कहर से सहम जाते हैं ये
आइने-सा टूटकर बिखर जाते हैं
ऐ मुश्किलों!!!!
रब से है यही दुआ मेरी कब से
हरक्षण मुश्किलें मिरे साथ रहें
जीतने का जिससे मुझे विश्वास रहे
निखरुं हीरे सम साहस मिरे पास रहे
ऐ मुश्किलों!!!!
अनिल कुमार
"निश्छल"

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