"सबका साथ जरूरी है"
गुल कह बैठा गुलशन से,
मेरे वजूद से तेरा वजूद है।
मैं जब तक तेरे पहलू में हूँ,
तब तक तू भी मौजूद है।
आसरे से मेरे तुझमें जान है,
मेरे कई तुझपे अहसान हैं।
मत इतरा सुंदरता पे अपनी
मेरी शाख से ही तू महान है।
मेरे कारण ही यहाँ कभी भी,
तुझपे ही मरता जहान है।
तेरे दर पे हरदम आकर,
सुकूँ लेता हर इंसान है।
मेरा अक्स तुझमें है बाकी,
मेरी दुवाएं भी तेरे साथ हैं।
पर छोड़ गर दिया तूने मुझे,
न फिर कोई,न वक्त साथ है।
स्वरचित
®अनिल कुमार
"निश्छल"
शिवनी
खरौंज
हमीरपुर
(उ०प्र०)
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