****गजल****
तर्ज-मुझे तेरी मोहब्बत का सहारा मिल गया होता
न मैं यूँ तन्हा हरदफ़ा होता,
गर न व्व हमसे बेवफ़ा होता।
न मैं यूँ...................
कश्ती प्यार की साहिल को पा ही लेती,
गर वक्त पर साथ तेरा मुझे मिल गया होता।
न मैं यूँ..........
जिंदगी कब बिन सहारे के चलती है,
हरकदम तेरा मुझे आसरा मिल गया होता।
न मैं यूँ ................
मुक़म्मल कुछ भी होता नसीब से,
फ़िर न कभी शिक़वा न गिला होता।
न मैं यूँ...........
गैर कल तक थे हम तुम्हारे लिए,
काश हमें तुमने कभी अपना कहा होता।
न मैं यूँ.................
(स्वरचित)
®अनिल कुमार "निश्छल"
हमीरपुर (उ०प्र०)
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