कभी अपने दिल में रहने तो दो,
गुलिस्तां-सा हमें महकने तो दो।
तेरी धड़कन मेरे दिल में धड़कनें तो दो,
आब तू मछली बन मुझे तड़पने तो दो।
इश्क़-ए-रब दर सजदा करने तो दो,
प्यार का मेरे पौधा दिल में उगने तो दो,
मेरे सीने पे इश्क़ की आग सुलगने तो दो,
इस आग की लपट को दहकने तो दो।
"निश्छल'' चाहे ख़्वाब-ओ-ज़ुस्तजू,
यादों में तेरी मुझे बसने तो दो।
अनिल कुमार
"निश्छल''
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