सुप्रभात मित्रों
कोयल
आयी ऋतु बसंत मतवाली
कूक रही है कोयल काली
हर पेड़-पेड़ हर डाली-डाली
बोली सुन हर्षाए देखो माली
सबके मन को है लुभाती
ये तो सबको है रिझाती
जब मीठी आवाज सुनाती
सुंदर-सुंदर गीत गाती
हर मुंडेर में आती जाती
झूम-झूम मधुपान कराती
कदम-कदम पे नाम कमाती
बागों में जब गुनगुनाती
मीठा बोलो हमें बताती
मीठी बोली सबको भाती
मन उदास हो, खुश कर जाती
लबों पे हँसी की रौनक लाती
©अनिल कुमार
"निश्छल''
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