एक पत्र मच्छर के नाम

★एक पत्र मच्छर के नाम★

सेवा में,
           श्री मान घनघोर अंधेरों के शहंशाह
,नींदभंजक और सुरीली तान के धनी मच्छर

महोदय,
               आप महान हो।अद्भुत हो।अवसरवादी हो।आपका हमें  अंधेरी सुनसान रात को इस कदर  सताना,धीरे से काटना और उड़ जाना बहुत भाता है।
आपकी मधुर,सुरीली एवम् नींदभंजक तान कानों में मधुरस घोल देती है;जिससे नींद तो क्या ? नींद की सोंचना भी गुनाह है।
              हाँ! एक बात और जो बहुत ही लाज़वाब और आपके हित की है; जब आप धीरे-धीरे कर्णप्रिय-नींदभंजक तान से नींद को छूमंतर कर देते हो; तो उसके बाद हमारा हाथ सहर्ष आपके जिस्म में तपाक से पड़ता है; और आप कुछ लम्हों में स्वर्ग सिधार जाते हैं।इतना सबकुछ घटित होने के बाद भी आपके सगे-संबंधी, नाते-रिश्तेदारों का क्या कहना? आ जाते हैं दोबारा हमें छेड़ने।
और इस तरह कुछ  रातें बेचैनी में,तारे गिनकर तथा चाँद को निहारते हुए कटती हैं।
               अतः श्रीमान निशाधीश आपसे प्रार्थना है कि अपने कुटुंब सहित हमें और हमारे सभी भाई-बंधुओ को मत छेड़े।
अन्यथा की स्थिति में दुर्घटनाएँ होगीं जिसके जिम्मेदार आप होंगें।
धन्यवाद!
                                             भवदीय
                आपसे परेशान मासूम प्राणी समुदाय

मौलिक और स्वरचित
अनिल कुमार
"निश्छल''

Post a Comment

0 Comments