कितने बदल गए हम

कल तक जहां में......लोगों की बातें
मील का पत्थर............हुआ करती थीं

दिल की हंसीं.....प्यारी बातें ही थीं
जो हर दिल को........छुआ करती थीं

आज दिल में........... जलन की आग है
उसमें जलता......खुद हर आदमी है

गैरों की आंखों में......देख अश्कों को
मुस्कुराता...अक्सर ....अब आदमी है

कितने सिमट गए हैं...... खुद में
कहाँ अपनों की..खबर.. किसी को
क़त्ल करता रिश्ते... हँसता फिर आदमी है

इंसां की शक़्ल में.....हैवान बन बैठे
लूटते....आबरू...छेड़ते सरेराह नारी को
जिंदगी तो है.....मर चुका आदमी है

अनिल कुमार
"निश्छल"
शिवनी,कुरारा
हमीरपुर(उ०प्र०)

Post a Comment

0 Comments