अटूट बंधन--(1)
रवि और कुसुम की शादी हुए अभी कुछ ही दिन बीते थे।सभी लोग खुशी-खुशी रह रहे थे;लेकिन एक दिन एक दर्द विदारक घकजोमज।घटना घटी।कुसुम अपनी सास से झगड़ा कर बैठी और अपने पति से झल्लाकर बोली,"या तो इस घर में मैं रहूंगी या तो तुम्हारी माँ", चयन तुम्हे करना है।
अब बीबी की बात कौन टाल सकता था क्योंकि उसके साथ पूरा जीवन जो बिताना है।
माँ तो केवल माँ ठहरी, वैसे भी कुछ ही दिन तो बचे हैं उनके जीवन के ।काफी सोच विचार के रवि ने फैसला किया, कि माँ को ट्रेन में बिठा दूंगा जिससे कहीं न कहीं लोगों से मांग-मांग कर भी अपना पेट भर लेंगीं।(रवि की माँ के प्रति संवेदना मर चुकी थी)। यही सोचते हुए अपनी और माँ की पैकिंग करवाई ।माँ ने पूँछा,
"बेटा, मुझे कहाँ लिए जा रहे हो,बताओ न।"रवि बोला,"माँ घर में आप बोर होती हैं;
इसलिए आपको चारोधाम की यात्रा करवाने लिए जा रहा हूँ।"
ऐसी बात सुनते ही माँ की आंखे चमक उठीं। अब तो
झटपट माँ अपने बेटे के साथ चलने के लिए तैयार हो गयी। रास्ते में माँ की कल्पनाशक्ति उड़ान भरने लगी थी। स्टेशन कब आ गया पता ही नहीं चला।रवि माँ से;यह कहते हुए चला गया;कि माँ यहीं रुकना।
मैं कुछ नास्ता ले के आ रहा हूँ।
माँ ने बोला ठीक है।1-2-3 घंटे कब बीते मालूम ही नहीं चला।
धीरे-धीरे रात हो गयी;पर माँ का दिल विचलित था और बुरे खयालातों को सोचकर द्रवित हो रहा था।आँखें उम्मीद लगाएं हुए अभी भी बेटे की राह देख रही थी।बेटा!बेटा!कहते हुए;
वह दुखियारी महिला बार-बार यहां से वहां भागकर जा रही थी। जैसे ही वह किसी युवक को देखती उसकी आँखों में उम्मीद की किरण जग जाती थी।न जाने किस कारण से वह आज एक रेलवे स्टेशन में अपने बेटे को तलाश रही थी।लेकिन उसका इकलौता बेटा उसको छोड़कर यह कहकर चला गया था कि मैं कुछ नास्ते के लिए ले लूं।माँ का मन इतना ममतामयी होता है कि उसके(रवि के)झूठ को भी वह समझ न पाई।जब ट्रेन चलने लगी तो दु:खियारी माँ जैसे तैसे ट्रेन से उतरी;परन्तु उसका बेटा उसे छोड़कर बहुत दूर जा चुका था।वो माँ अपने बेटे को हर रोज तलाशती, लेकिन उसका बेटा उससे न तो मिलने आ रहा था न ही उसकी कोई खबर ले रहा था।मायूश चेहरा,व्यथित हृदय और उम्मीदों को समेटे आज भी वह अपने बेटे की राह देख रही थी; लेकिन उसके बेटे का कोई अता-पता नहीं था।माँ-बेटे का अटूट बंधन अभी भी टूटने को तैयार नहीं था; क्योंकि यह संसार का सबसे शानदार बंधन जो था।
स्वरचित
®अनिल कुमार "निश्छल"
शिवनी,कुरारा
हमीरपुर(उ०प्र०)
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