दोहे--अदनी सी कोशिश
तन इंसानी पाइके, करिए ऐसे काम।
11 222 212 112 22 21
याद करे जहां सारा,सुबह हो या शाम।१।
21 12 12 22 111 2 2 21
माया है मनमोहिनी,कठपुतली दे बनाय।
22 2 11212 11112 2 121
भजता चल रब को सदा,अंत समय पछताय।
112 11 11 2 12 21 111 1121
मिट्टी की है काया तेरी,मिट्टी का संसार।
12 2 2 22 22 12 2 221
बन राख मिलें धरा में,चले काल की मार।३।
11 21 12 12 2 12 21 2 21
अंतिम यात्रा निकले जब,जाते सब हैं साथ।
211 22 112 11 22 11 2 21
होती भीड़ हजारों की,तब खुल जाते हाथ।४।
22 21 122 2 11 11 22 21
रब ने रचा है विधान,अटल सत्य हर बार।
11 2 12 2 121 111 12 11 21
होती समीप मौत जब, ताक रहे हैं चार।
22 121 21 11 21 1 2 2 21
अनिल कुमार "निश्छल''
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